Published On: गुरु, मई 25th, 2017

अफसरों को पता नहीं-एक ही रज‍िस्ट्रेशन नंबर पर चले रहे फार्मास‍िस्टों की 2-2 दुकानें

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licence_1495708540लखनऊ। यूपी में मेडिकल स्टोर्स खोलने के नाम पर जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। मामला दो अलग-अलग फार्मासिस्टों को एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करने से जुड़ा है। इस फर्जीवाड़े में एफडीए (फूड एंड ड्रग एडम‍िन‍िस्ट्रेशन) और फार्मेसी काउंसिल के कुछ अधिकारियों के मिलीभगत होने का शक जताया जा रहा है। TajaSamachar.In ने जब इसकी जांच-पड़ताल की तो एफडीए और फार्मेसी काउंस‍िल के दावों की पोल खुल गई। फर्जीवाड़े से जुड़े एविडेंस म‍िलने के बाद मामले में अधिकारी एक-दूसरे के ऊपर ठीकरा फोड़ने में लगे हैं। उन्होंने कहा क‍ि अभी हमें पता नहीं है, जांच करवाएंगे।

महराजगंज डिस्ट्रिक्ट के घुघली क्षेत्र के मस्जिद टोला निवासी धनंजय कुमार कनौजिया, S/O रमेश कनौजिया को यूपी फार्मेसी काउंस‍िल, लखनऊ की तरफ से 20 मई 2016 को रजिस्ट्रेशन नंबर प्रदान किया गया। उनका रजिस्ट्रेशन नंबर 68183 है। उसके ठीक 8 महीने बाद 13 जनवरी 2017 को संतकबीर नगर निवासी उमा शंकर पांडेय, S/O उदयभान पांडेय को भी वहीं रजिस्ट्रेशन नंबर 68183 जारी क‍िया गया है।फार्मेसी काउंस‍िल और एफडीए से जुड़े कुछ अधिकारियों ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि दो अलग-अलग फार्मासिस्टों के रजिस्ट्रेशन नंबर कभी भी एक समान नहीं हो सकते हैं।यदि दो अलग-अलग फार्मासिस्टों को एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किया गया है तो ये गलत है। इसकी जांच होनी चाहिए। जो लोग भी इसके लिए दोषी हों, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए।बता दें, इस तरह का ये कोई पहला मामला नहीं है, बल्कि ऐसे कई दस्तावेज मौजूद हैं जिसमें दो अलग-अलग लोगों को एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी किए गए हैं।

क्या कहते हैं अध‍िकारी
असिस्टेंट कमिश्नर ड्रग, डीके तिवारी ने बताया, फार्मासिस्टों को रजिस्ट्रेशन नंबर जारी करने का काम यूपी फार्मेसी काउंस‍िल का है। दो अलग-अलग फार्मासिस्टों को एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो ये गलत है। फार्मेसी काउंस‍िल को ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ा एक्शन लेना चाहिए।वहीं, फार्मेसी काउंसिल के चेयरमैन रहे सुनील यादव के मुताबिक, फार्मेसी काउंस‍िल का मुद्दा कोर्ट में चल रहा है। इसलिए ऑफिसियली तौर पर इस बारें में कुछ भी नहीं कहेंगे। हालांक‍ि, फार्मेसी काउंसिल ने एक भी गलत रजिस्ट्रेशन नंबर अभी तक जारी नहीं किया है।काउंसिल के संज्ञान में आया है कि कुछ लोग टेक्नोलॉजी का गलत इस्तेमाल कर खुद अपने से फर्जी मार्कशीट बनवाने का काम कर रहे हैं। ऐसे लोगों से काउंसिल का कुछ भी लेना देना नहीं है।ड्रग इंस्पेक्टर संजय यादव ने कहा, दो अलग-अलग फार्मासिस्टों को एक ही रजिस्ट्रेशन नंबर जारी नहीं किए जा सकते हैं। यदि ऐसा हुआ है तो ये सही नहीं है। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।